Hindi poetry- warning note:मेरे प्रति तुम्हारे द्वेष, कुटिलता से मैं अनभिज्ञ नहीं। - Path Me Harshringar : by Abhijit Thakur

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Friday, 8 February 2019

Hindi poetry- warning note:मेरे प्रति तुम्हारे द्वेष, कुटिलता से मैं अनभिज्ञ नहीं।


मेरे प्रति तुम्हारे द्वेष,
कुटिलता से मैं अनभिज्ञ नहीं।

है आश्वासन मेरे
घात भूला दूँगा,

एक या दो, सौ तक करूँ
प्रतिक्षा,सुनो! मैं कृष्ण नहीं।

तीसरे पर ही काट
मस्तक तुम्हारा, काली को
अर्पण, मैं कर दूँगा।

वंशबेल के रक्त से भी तुम्हारे,
देवी का खप्पर भर दूँगा।
कान खोल सुन लो,
रखना दुरी मुझसे,
पुन: चेतावनी मैं,अब न दूँगा।।

अभिजीत ठाकुर


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