Hindi Spiritual poetry: चलो कभी फुर्सत में साथ मेरे है सफर! - Path Me Harshringar : by Abhijit Thakur

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Wednesday, 6 February 2019

Hindi Spiritual poetry: चलो कभी फुर्सत में साथ मेरे है सफर!


चलो कभी फुर्सत में,

साथ मेरे है सफर अनंत के।
अनेक सृष्टियोँ के पार
भी और जहाँ होगेँ।।

अपने प्रेम का नव
आयाम, तब ही जुड़
सकेगा।सच्चे अर्थोँ में अपने
प्रेम में तब ही आदि,
मध्य या अंत ना होगेँ।।

व्यर्थ के तर्कोँ पर समय
नष्ट ना करो,हो सके तो
इसी क्षण चलो।
मूंद कर आँखेँ, हृदयाकाश
में विचरण करो।।

असंख्य आकाश गंगाओँ
को समेटे, प्रलय एवं सृजन
के नित नूतन कौतुक करते।
हरिहर देखो घट में बैठे।।

दिव्य सुगंधोँ से अच्छादित
तुम रोम रोम पाओगे,
जो कर्ण सुन नहीं सकते,
वो स्वर लहरी सुन पाओगे।

जीवनामृत यही है
मोक्ष, लक्ष्य और अभिष्ट।
मानव जीवन के उत्थान हेतु,
विधि द्वारा यही निर्दिष्ट।।

अभिजीत ठाकुुुर

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